मोतियाबिंद (Cataract) भारत में होने वाली सबसे आम नेत्र समस्याओं में से एक है, खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे दृष्टि को पूरी तरह धुंधला कर सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि मोतियाबिंद का उपचार सुरक्षित, प्रभावी और 100% सफल माना जाता है, बस सही समय पर निदान और इलाज जरूरी है।
इस संपूर्ण गाइड में हम जानेंगे:
- मोतियाबिंद क्या है
- क्यों होता है
- इसके प्रमुख लक्षण
- किस उम्र में अधिक होता है
- मोतियाबिंद के प्रकार
- इलाज और ऑपरेशन कैसे होता है
- ऑपरेशन की कॉस्ट
- Bathinda में मोतियाबिंद के लिए सर्वश्रेष्ठ अस्पताल
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मोतियाबिंद क्या है?
मोतियाबिंद आंख के प्राकृतिक लेंस का धीरे-धीरे धुंधला होना है। आंख का लेंस पारदर्शी होता है, जिससे रोशनी रेटिना तक पहुंचती है। लेकिन जब यह लेंस सफेद या धुंधला होने लगता है, तो दृष्टि कमजोर होने लगती है, जिसे हम “मोतियाबिंद” कहते हैं।
यह कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है, यह समय के साथ बढ़ती है।
मोतियाबिंद क्यों होता है? (कारण)
मोतियाबिंद होने के प्रमुख कारण:
- उम्र के साथ लेंस का कमजोर होना
- डायबिटीज
- लंबे समय तक धूप/UV एक्सपोज़र
- स्टेरॉइड दवाओं का लंबे समय तक सेवन
- आंख की चोट या सर्जरी
- धूम्रपान और शराब सेवन
- अनुवांशिक कारण
मोतियाबिंद कैसे होता है?
लेंस के प्रोटीन उम्र या अन्य कारणों से टूटकर जमा होने लगते हैं। यह जमा लेंस को धुंधला बनाता है और प्रकाश का रास्ता रोक देता है।धीरे-धीरे रोशनी रेटिना तक साफ नहीं पहुंचती और दृष्टि कम होने लगती है।
मोतियाबिंद के लक्षण
नीचे दिए गए मोतियाबिंद के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें:
- धुंधला या धुंध-धुंध दिखाई देना
- रात में देखने में कठिनाई
- तेज रोशनी में चुभन
- रंग फीके दिखना
- डबल विज़न
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
- लाइट्स के चारों ओर “हेलो” दिखना
- पढ़ने में दिक्कत
अगर मोतियाबिंद बढ़ जाए तो चीजें “धुंधली दीवार के पीछे” जैसी दिखने लगती हैं।
मोतियाबिंद के प्रकार
1. न्यूक्लियर स्क्लेरोटिक कैटरैक्ट
उम्र बढ़ने के साथ लेंस के केंद्र में कठोरता और धुंधलापन।
2. कॉर्टिकल कैटरैक्ट
लेंस के किनारों पर सफेद वेज-शेप धुंधलापन।
3. पोस्टेरियर सबकैप्सुलर कैटरैक्ट
लेंस के पीछे की सतह पर तेजी से बढ़ने वाला कैटरैक्ट (डायबिटीज में सामान्य)।
4. कनजेनिटल कैटरैक्ट (जन्मजात)
5. ट्रॉमैटिक कैटरैक्ट
चोट के बाद विकसित।
मोतियाबिंद का निदान कैसे किया जाता है?
Vasu Eye Institute and Skin Centre में इन उन्नत तकनीकों से जाँच होती है:
- स्लिट लैम्प परीक्षा
- विज़ुअल एक्युटी टेस्ट
- IOL Master 700 द्वारा सटीक लेंस माप
- AL Scan
- रेटिना जाँच (किसी और बीमारी की पुष्टि के लिए)
मोतियाबिंद का इलाज – केवल सर्जरी
कोई दवाई, चश्मा या eye drops मोतियाबिंद ठीक नहीं कर सकते।
केवल एक सुरक्षित और आधुनिक सर्जरी ही इसका इलाज है।
Vasu Eye Institute, Bathinda में कैटरैक्ट सर्जरी:
- AI-Guided Callisto Suite
- Zeiss Lumera Microscope
- Intuitive Phaco System
का उपयोग करके की जाती है, जिससे सर्जरी बेहद सटीक, सुरक्षित और painless होती है।
मोतियाबिंद ऑपरेशन कैसे होता है?
मोतियाबिंद का ऑपरेशन एक तेज़ और सुरक्षित प्रक्रिया है। पहले, आँख में डाले जाने वाले numbing drops से आँख को सुन्न किया जाता है ताकि मरीज को किसी तरह का दर्द महसूस न हो। इसके बाद, सर्जन आँख के किनारे पर 2–2.2 mm का एक बेहद छोटा माइक्रो-इंसिशन बनाते हैं। इसी चीरे के माध्यम से धुंधला प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे निकाल दिया जाता है। जैसे ही पुराना लेंस हट जाता है, उसकी जगह एक साफ़ और पारदर्शी आर्टिफिशियल IOL (Monofocal, Toric, Multifocal, Trifocal या EDOF) लगा दिया जाता है।
Callisto AI सिस्टम सर्जरी के दौरान लेंस की सटीक पोज़िशनिंग में मदद करता है, जिससे परिणाम और भी बेहतर मिलते हैं। सर्जरी केवल 10–15 मिनट में पूरी हो जाती है और चीरा इतना छोटा होता है कि टांकों की जरूरत नहीं पड़ती।
मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद रिकवरी बहुत तेज़ होती है। मरीज 1–2 दिनों में हल्के काम कर सकता है और 7–10 दिनों में दृष्टि स्थिर होने लगती है। पूरी तरह स्पष्ट दृष्टि आमतौर पर 2–3 हफ्तों में मिलती है।
मोतियाबिंद Operation Cost
अगर आप Eye Care Hospital Bathinda में खोज रहे हैं, तो Vasu Eye Institute में कीमतें पारदर्शी और किफायती मिलती हैं।
Standard Phaco + Monofocal IOL
₹15,000 – ₹30,000 प्रति आँख
Toric Lens
₹30,000 से शुरू
Multifocal Lens
₹45,000 – ₹65,000 प्रति आँख
Trifocal Lens
₹60,000 – ₹80,000 प्रति आँख
EDOF Lens
₹55,000 – ₹75,000 प्रति आँख
India में cataract surgery की range: ₹25,000 – ₹1,20,000. Final cost इस पर निर्भर करती है:
- चुना गया लेंस
- Callisto AI surgery या standard phaco
- insurance coverage
- pre/post-operative tests
बठिंडा में कैटरैक्ट (मोतियाबिंद) का सबसे उन्नत और सुरक्षित इलाज Vasu Hospital Bhatinda में उपलब्ध है, जहाँ Callisto AI-Guided तकनीक, Zeiss माइक्रोस्कोप और अनुभवी सर्जनों की टीम बेहतरीन परिणाम देती है।
मोतियाबिंद पूरी तरह ठीक होने वाली अवस्था है और आधुनिक तकनीक से सर्जरी तेज़, सुरक्षित व दर्द-रहित हो गई है। सही समय पर जांच और सही IOL चुनने से मरीज को फिर से साफ़, तेज़ और आरामदायक दृष्टि मिलती है। Vasu Eye Institute, Bathinda- कैटरैक्ट सर्जरी के लिए एक विश्वसनीय और उन्नत केंद्र है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह आँख के प्राकृतिक लेंस का धुंधला होना है, जिससे दृष्टि धीरे-धीरे धुंधली और कमज़ोर हो जाती है।
धुंधली दृष्टि, रात में देखने में परेशानी, डबल विज़न और रंग फीके दिखना।
बढ़ती उम्र, डायबिटीज, steroid उपयोग, आँख की चोट या आनुवंशिक कारणों से लेंस धुंधला होने लगता है।
न्यूक्लियर, कॉर्टिकल, सब-कैप्सुलर, पोस्टेरियर कैप्सुलर और congenital मोतियाबिंद।
नहीं। मोतियाबिंद का एकमात्र उपचार सर्जरी है; दवाइयाँ या चश्मा इसे ठीक नहीं कर सकते।
छोटे चीरे से धुंधला लेंस हटाकर उसकी जगह साफ़ आर्टिफिशियल IOL लगाया जाता है। प्रक्रिया 10–15 मिनट की होती है।
1–2 दिनों में सामान्य कार्य संभव और 2–3 हफ्तों में दृष्टि और भी स्पष्ट हो जाती है।
₹15,000 से ₹80,000+ तक, चुने गए IOL और तकनीक (Phaco, MICS, Callisto AI) के आधार पर।
हाँ, बिल्कुल — बस शुगर नियंत्रित होनी चाहिए और retina की जांच जरूरी है।
नहीं। मोतियाबिंद वापस नहीं होता, पर posterior capsule पर हल्की धुंधलाहट (after-cataract) हो सकती है, जो YAG laser से ठीक हो जाती है।
Vasu Eye Institute: उन्नत AI-Guided Callisto Suite और अनुभवी सर्जनों के साथ।
Standard monofocal lens ₹15,000–₹30,000; premium lenses ₹45,000–₹80,000+
Standard monofocal lens ₹15,000–₹30,000; premium lenses ₹45,000–₹80,000+
हाँ, AI-guided ZEISS Callisto Suite और उन्नत phaco/MICS तकनीक उपलब्ध है।
Vasu Eye Institute को +91 95014 43977 पर कॉल करें या वेबसाइट पर बुकिंग करें।
हाँ, painless सर्जरी, आसान प्रक्रिया और same-day discharge बुजुर्गों के लिए सुविधाजनक है।
कई बार हाँ — मोतियाबिंद रौशनी कम करता है, पर हर कमज़ोर दृष्टि मोतियाबिंद नहीं होती। जांच ज़रूरी है।
हाँ, अत्याधुनिक तकनीक के साथ यह भारत की सबसे सुरक्षित और सफल प्रक्रियाओं में से एक है।



